कालसर्प पूजा त्र्यंबकेश्वर बुकिंग | Kaal Sarp Puja in Trimbakeshwar
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त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा खर्च (Cost of Kaal Sarp Puja in Trimbakeshwar)
कालसर्प दोष क्या है? (What is Kaal Sarp Dosh?)
ज्योतिष शास्त्र में काल सर्प दोष को बेहद खतरनाक दोष माना जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में कई तरह की मुश्किलें, संघर्ष और परेशानियां लेकर आता है। जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष योग बनता है। कालसर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे नौकरी में स्थिरता न रहना, व्यापार में लगातार नुकसान का सामना करना, मानसिक तनाव, दैनिक जीवन में परेशानियां।
त्र्यंबकेश्वर कालसर्प दोष पूजा बुकिंग
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त्र्यंबकेश्वर कालसर्प दोष पूजा फोटो
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त्र्यंबकेश्वर मे कालसर्प पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ पंडित
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कालसर्प दोष क्या है? (What is Kaal Sarp Dosh?)
ज्योतिष शास्त्र में काल सर्प दोष को बेहद खतरनाक दोष माना जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में कई तरह की मुश्किलें, संघर्ष और परेशानियां लेकर आता है। जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष योग बनता है। कालसर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे नौकरी में स्थिरता न रहना, व्यापार में लगातार नुकसान का सामना करना, मानसिक तनाव, दैनिक जीवन में परेशानियां।
कालसर्प दोष के लक्षण — कैसे पहचानें कि आपकी कुंडली में यह दोष है?
कुंडली मे कालसर्प दोष को कैसे पहचाने? बहुत से लोग वर्षों तक कालसर्प दोष से पीड़ित रहते हैं, लेकिन इसका कारण नहीं जान पाते। यदि आपके जीवन में नीचे दिए गए 3 या उससे अधिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो आपकी कुंडली में कालसर्प दोष होने की संभावना है:
सपनों में सांप या पूर्वज दिखना
कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को बार-बार सपने में सांप दिखता है — कभी काटता हुआ, कभी पीछा करता हुआ। मृत पूर्वजों और परिजनों को सपने में देखना भी इस दोष का एक प्रमुख संकेत है। कुछ लोगों को सोते समय गले में दबाव या घुटन का अनुभव होता है।
करियर और धन में बाधाएं
कड़ी मेहनत के बावजूद सफलता हाथ नहीं आती। प्रमोशन बार-बार रुकती है, व्यापार में नुकसान होता रहता है, और अचानक आर्थिक संकट आ जाते हैं। व्यक्ति यह महसूस करता है कि जैसे उसके सभी प्रयास किसी अदृश्य शक्ति द्वारा रोके जा रहे हैं।
विवाह और पारिवारिक जीवन में समस्याएं
विवाह में देरी होना, जीवनसाथी से बार-बार झगड़ा, संतान प्राप्ति में कठिनाई, या परिवार के सदस्यों से बिना किसी ठोस कारण के संबंध बिगड़ना — ये सभी कालसर्प दोष के सामान्य लक्षण हैं।
स्वास्थ्य और मानसिक अशांति
बिना कारण चिंता और घबराहट होना, ऊंचाई से डर लगना, अंधेरे में घबराहट, और ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं जो बार-बार वापस आती रहती हैं — इस दोष के कारण हो सकती हैं।
नकारात्मक ऊर्जा का अहसास
भीड़ में होते हुए भी अकेलापन महसूस करना, यह लगना कि भाग्य कभी साथ नहीं देता, और लगातार यह विचार आना कि कोई अदृश्य शक्ति आपको आगे बढ़ने से रोक रही है — ये संकेत कालसर्प दोष की ओर इशारा करते हैं।
यदि आप इनमें से 3 या अधिक लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो आज ही पंडित कैलाश शास्त्री जी से अपनी कुंडली निःशुल्क जांच करवाएं — 8421048228
कालसर्प दोष के 12 प्रकार:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली मे अनंत कालसर्प दोष तब बनता है, जब राहु लग्न भाव में होता है, जबकि केतु सातवें भाव में स्थित होता है, और शेष सभी ग्रह भाव इन दोनों ग्रहो के बीच में स्थित होते हैं। इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति को सफलता पाने के लिए बहुत प्रयास करने पड़ते है। उन्हें कई बाधाओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उन्हें जीवन मे लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ता है। इस दोष के कारण व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
कुलिक कालसर्प दोष योग तब बनता है, जब राहु दूसरे भाव में और केतु आठवें भाव में स्थित होता है, और अन्य सभी ग्रह इन दो ग्रहो के बीच स्थित होते हैं। इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति लगातार असफलताओं का सामना करते हैं और उन्हे काफी अपमान का सामना करना पड़ता है। उन्हें आर्थिक नुकसान, धोखे, उनकी खुशियों में बाधाएँ और अपमान की नियमित घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
वासुकी कालसर्प दोष तब बनता है जब राहु तृतीय भाव में और केतु नौवें भाव में होता है, और अन्य सभी ग्रह इन दोनों ग्रहो के बीच स्थित होते हैं। इस दोष के कारण व्यक्ति के पारिवारिक रिश्ते सही नहीं रहते है। जिसके कारण परिवार मे सदैव तनाव का वातावरण रहता है। दोष के कारण आथिक स्थिति भी सही नहीं रहती है।
जब राहु चौथे भाव में और केतु दसवें भाव में स्थित हो, तथा अन्य सभी ग्रह उनके बीच स्थित हों, तो इस ज्योतिषीय स्थिति को शंखपाल काल सर्प दोष कहा जाता है। इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति अक्सर अपने घर में वित्तीय कठिनाइयों, स्वास्थ्य समस्याओं और विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हैं। व्यक्ति को अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
पद्म काल सर्प दोष तब बनता है, जब राहु पांचवें भाव में और केतु ग्यारहवें भाव में स्थित होता है, तथा अन्य सभी ग्रह उन दोनो ग्रहो के बीच स्थित होते हैं। यह ज्योतिषीय स्थिति शिक्षा में महत्वपूर्ण चुनौतियों का कारण बन सकता है, जिससे व्यक्ति की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। इस दोष के कारण व्यक्ति का पढ़ाई मे मन नहीं लगता है।
महापद्म कालसर्प दोष कुंडली मे तब बनता है, जब राहु छठे भाव में और केतु बारहवें भाव में स्थित होता है, तथा अन्य सभी ग्रह इन दो ग्रहो के बीच स्थित होते हैं। इस स्थिति के परिणामस्वरूप महापद्म काल सर्प दोष बनता है। इस दोष के करना व्यक्ति के पारिवारिक रिश्तो मे लड़ाई झगड़े होते है। जिसके कारण व्यक्ति की अपने ही रिश्तेदारों से अनबन होती रहती है।
तक्षक कालसर्प दोष तब बनता है, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु सातवें भाव में और राहु पहले भाव में स्थित होते हैं। इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति के वैवाहिक जीवन और साझेदारी संबंधों में समस्याए उत्पन्न होती हैं। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में तनाव, गलतफहमी और असंतुलन का सामना करना पड़ता है। साथ ही, व्यवसाय में साझेदारी करने पर भी कठिनाइयाँ और हानि का सामना करना पड़ता है।
कर्कोटक काल सर्प दोष तब बनता है, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु दूसरे भाव में और राहु आठवें भाव में स्थित होता है। इस दोष के कारण व्यक्ति के कार्यक्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे कई चुनौतियाँ आती हैं और मुख्य रूप से करियर की उन्नति में बाधा आती है, जिसमें पदोन्नति प्राप्त करने की संभावना भी शामिल है।
शंखचूड़ कालसर्प दोष तब बनता है, जब केतु तृतीय भाव में और राहु नवे भाव में स्थित हो, तथा अन्य सभी ग्रह इन दोनो भावो के बीच स्थित हों। इस दोष से पीड़ित व्यक्तियों को अक्सर अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने मे बहुत अधिक समय लगता है। इस दोष के कारण व्यक्ति को मानसिक समस्या का सामना अधिक करना पड़ता है।
घातक कालसर्प दोष तब उत्पन्न होता है, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु चौथे भाव में और राहु दसवें भाव में स्थित होता है। इस दोष के कारण व्यक्ति का स्वभाव अहंकारी और गुस्सैल हो जाता है। व्यक्ति को छोटी – छोटी बातो पर अधिक गुस्सा आता है।
विषधर कालसर्प दोष कुंडली मे तब बनता है, जब केतु पांचवें भाव में और राहु ग्यारहवें भाव में स्थित हो, तथा अन्य सभी ग्रह इन दोनो ग्रहो के बीच स्थित हों। इस दोष के कारण व्यक्ति को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बहुत अधिक संघर्ष का सामना करना पड़ता है। पैतृक संपत्ति होने के बाद भी व्यक्ति को धन संबन्धित हानि होती रहती है।
शेषनाग काल सर्प दोष तब बनता है, जब केतु छठे भाव में और राहु बारहवें भाव में स्थित होता है, तथा अन्य सभी ग्रह इन दोनो ग्रहो के बीच स्थित होते हैं। इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति को नौकरी नहीं मिलती है, उसे बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है।
इन 12 प्रकार के कालसर्प दोष में से जिनकी पूजा की जाती है उनकी पूजा भी अलग तरीके से की जाती है।
कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव
कालसर्प दोष एक ऐसा दोष है जिसका सीधा असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है-
- इस दोष के कारण व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। व्यक्ति को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
- बार-बार कर्ज या धन-हानि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- व्यापार में लगातार नुकसान का सामना करना पड़ता है।
- पारिवारिक विवादों के कारण व्यक्ति को कानूनी और न्यायिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- व्यक्ति के जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव महसूस होता है।
- मेहनत करने के बाद भी व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती
कालसर्प दोष कितने साल तक रहता है?
एक सबसे सामान्य प्रश्न जो लोग पूछते हैं वह यह है — क्या कालसर्प दोष जीवनभर रहता है? इसका उत्तर आपकी कुंडली में राहु की स्थिति पर निर्भर करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यह दोष अलग-अलग भावों में अलग-अलग समय तक प्रभावी रहता है:
| कुंडली में राहु की स्थिति | दोष का प्रभाव काल |
|---|---|
| प्रथम भाव (लग्न) | 27 वर्ष की आयु तक |
| द्वितीय भाव | 33 वर्ष की आयु तक |
| तृतीय भाव | 36 वर्ष की आयु तक |
| चतुर्थ भाव | 42 वर्ष की आयु तक |
| पंचम भाव | 48 वर्ष की आयु तक |
| षष्ठ भाव | 54 वर्ष की आयु तक |
कुछ गंभीर मामलों में यह दोष 55 वर्ष की आयु तक प्रभावी रह सकता है। हालांकि, त्र्यंबकेश्वर जैसे शक्तिशाली ज्योतिर्लिंग में विधिवत कालसर्प दोष पूजा करने से इस दोष के प्रभाव को बहुत पहले ही समाप्त किया जा सकता है।
अपनी कुंडली में राहु की स्थिति जानने के लिए पंडित कैलाश शास्त्री जी से निःशुल्क कुंडली विश्लेषण करवाएं — 📞 8421048228
त्र्यंबकेश्वर कालसर्प दोष पूजा क्या है? (What is Kaal Sarp Puja in Trimbakeshwar?)
काल सर्प दोष पूजा ऐसे व्यक्तियों के लिए की जाती है जिनकी कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं, जिसके कारण व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह पूजा दोष के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए की जाती है। त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा करने से पूजा का प्रभाव बढ़ जाता है, क्योंकि भगवान शिव का आशीर्वाद यहाँ शीघ्र प्राप्त होता है, जिससे इस दोष से मुक्ति मिलती है। पूजा के बाद जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शक्ति और शांति बढ़ती है।
त्र्यंबकेश्वर मे कालसर्प दोष पूजा के लाभ (Benefits of Kaal Sarp Puja)
काल सर्प दोष पूजा के कई लाभ हैं, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। पूजा के लाभ इस प्रकार हैं
- पूजा से व्यक्ति की आर्थिक और वित्तीय स्थिति में सुधार होता है।
- पूजा के प्रभाव से बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
- वैवाहिक जीवन और पारिवारिक संबंधों में सुधार होता है।
- दैनिक जीवन में आ रही परेशानियां खत्म होती हैं।
- व्यापार में सफलता मिलती है।
- पूजा के बाद जीवन में सुख और शांति आती है।
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा का महत्व (Why Trimbakeshwar is Best for Kaal Sarp Puja)
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। भगवान शिव यहां त्र्यंबक रूप में विराजमान हैं। यहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा की जाती है। यहां किया गया कोई भी अनुष्ठान प्रभावशाली माना जाता है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर का वातावरण और गोदावरी नदी की पवित्रता धार्मिक अनुष्ठानों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है। त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प दोष पूजा करने से पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख और शांति आती है।
कालसर्प पूजा के बाद महत्वपूर्ण नियम और सावधानियां (Rules After Puja)
त्र्यंबकेश्वर मे कालसर्प दोष पूजा कराने के बाद कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है। ये नियम इस प्रकार हैं-
- पूजा के बाद 7 दिनों तक केवल शुद्ध और सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
- पूजा के बाद कुछ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं करनी चाहिए।
- पूजा के बाद त्र्यंबकेश्वर या नजदीकी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।
- पूजा के बाद नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
- किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
- पूजा के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए।
त्र्यंबकेश्वर कालसर्प दोष निवारण पूजा से इस दोष को पूर्ण रूप से समाप्त कैसे करे।
ऐसे बहुत उपाय हैं जिनको अपनाकर कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है, यदि आप कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से सदैव के लिए मुक्ति पाना चाहते हैं, तो आपको कालसर्प दोष की पूजा करनी चाहिए। कालसर्प दोष को समाप्त करने के लिए यह सबसे प्रभावी और सरल उपाय है। इसके लिए बहुत अधिक समय की आवश्यकता नहीं होती है। पंडित जी से पूजा का दिन निश्चित करें और त्र्यंबकेश्वर में पूजा के लिए आएं। अगर आप किसी कारणवश पूजा के लिए त्रिंबकेश्वर नहीं आ पा रहे है, तो आप ऑनलाइन काल सर्प दोष पूजा भी करा सकते हैं। पंडित जी आपके नाम, गौत्र का उपयोग करके आपकी ओर से पूजा करेंगे।
घर बैठे ऑनलाइन कालसर्प दोष पूजा — कैसे होती है?
क्या आप त्र्यंबकेश्वर नहीं आ सकते? अब आप घर बैठे भी कालसर्प दोष पूजा का पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
ऑनलाइन पूजा कैसे होती है?
पंडित कैलाश शास्त्री जी त्र्यंबकेश्वर में सम्पूर्ण पूजा करते हैं और पूरा अनुष्ठान लाइव वीडियो कॉल के माध्यम से आप देख सकते हैं।
ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया
- पंडित जी को कॉल या व्हाट्सएप करके अपना स्लॉट बुक करें
- अपना पूरा नाम, गोत्र, जन्म तिथि और जन्म स्थान दें
- निर्धारित तिथि पर लाइव वीडियो कॉल से जुड़ें
- पंडित जी के मार्गदर्शन में ऑनलाइन संकल्प लें
- पंडित जी आपके नाम और गोत्र से त्र्यंबकेश्वर में पूजा करते हैं
- पूजा का प्रसाद कुरियर द्वारा आपके घर भेजा जाता है
क्या ऑनलाइन पूजा उतनी ही प्रभावी है?
हां। पूजा की शक्ति पवित्र स्थान (त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग) और सही वैदिक विधि से आती है — दोनों ऑनलाइन पूजा में भी उतने ही प्रभावशाली रहते हैं।
ऑनलाइन पूजा खर्च: ₹1100 / ₹2100 / ₹5100
प्रसाद: भारत में कहीं भी घर पहुंचाया जाएगा
आज ही बुक करें — 📞 8421048228
2026 में कालसर्प दोष पूजा के शुभ मुहूर्त (त्र्यंबकेश्वर) (Best Day for Kaal Sarp Puja)
त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प दोष पूजा के लिए 2026 का वर्ष बहुत विशेष है क्योंकि इस वर्ष नाग पंचमी और श्रावण सोमवार का अद्भुत संयोग (coincidence) बन रहा है। यहाँ 2026 के कालसर्प पूजा लिए सबसे शुभ मुहूर्तों और तिथियों का विस्तृत चार्ट दिया गया है।
महत्वपूर्ण: त्र्यंबकेश्वर में यह पूजा मुख्य रूप से अमावस्या, नाग पंचमी, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में की जाती है। पूजा के लिए ‘पंचांग शुद्धि’ आवश्यक होती है, इसलिए बुकिंग से पहले अपने पंडित जी से अपनी जन्म कुंडली के अनुसार तारीख पक्की जरूर करें।
| महीना (Month) | शुभ तिथि (Date) | दिन (Day) | विशेष योग/टिप्पणी (Remarks) |
| जनवरी | 18 जनवरी 2026 | रविवार | मौनी अमावस्या (वर्ष की पहली और बहुत शुभ अमावस्या) |
| फरवरी | 15 फरवरी 2026 | रविवार | महाशिवरात्रि (काल सर्प दोष निवारण के लिए वर्ष का सबसे शक्तिशाली दिन) |
| 17 फरवरी 2026 | मंगलवार | माघ अमावस्या | |
| मार्च | 19 मार्च 2026 | गुरुवार | फाल्गुन अमावस्या |
| अप्रैल | 17 अप्रैल 2026 | शुक्रवार | चैत्र अमावस्या |
| मई | 16 मई 2026 | शनिवार | वैशाख अमावस्या (शनिश्चरी अमावस्या का योग बन सकता है) |
| 17 मई से 15 जून | – | अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) शुरू – पूजा के लिए पंडित जी से सलाह लें | |
| जून | 15 जून 2026 | सोमवार | ज्येष्ठ अमावस्या (सोमवती अमावस्या – अति दुर्लभ और शुभ योग) |
| जुलाई | 14 जुलाई 2026 | मंगलवार | आषाढ़ अमावस्या |
| अगस्त | 17 अगस्त 2026 | सोमवार | नाग पंचमी + पहला श्रावण सोमवार (पूरे वर्ष का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त) |
| (श्रावण मास) | 24 अगस्त 2026 | सोमवार | दूसरा श्रावण सोमवार |
| 31 अगस्त 2026 | सोमवार | तीसरा श्रावण सोमवार | |
| सितंबर | 07 सितंबर 2026 | सोमवार | चौथा (अंतिम) श्रावण सोमवार |
| 11 सितंबर 2026 | शुक्रवार | श्रावण अमावस्या (पिठोरी अमावस्या) | |
| अक्टूबर | 10 अक्टूबर 2026 | शनिवार | सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष में पूजा के लिए उत्तम) |
| नवंबर | 09 नवंबर 2026 | सोमवार | अश्विन अमावस्या (दीपावली – लक्ष्मी पूजन) |
| दिसंबर | 08 दिसंबर 2026 | मंगलवार | मार्गशीर्ष अमावस्या |
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की सम्पूर्ण विधि
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा पूर्णतः वैदिक परंपरा के अनुसार की जाती है। पंडित कैलाश शास्त्री जी द्वारा पालन की जाने वाली सम्पूर्ण विधि इस प्रकार है:
चरण 1 — पवित्र स्नान और शुद्धिकरण
पूजा के दिन प्रातःकाल त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पास स्थित पवित्र कुशावर्त कुंड में स्नान किया जाता है। पूजा के दिन काले रंग के वस्त्र बिल्कुल न पहनें।
चरण 2 — संकल्प
पंडित जी यजमान से संकल्प करवाते हैं। इसमें यजमान का पूरा नाम, गोत्र, जन्म तिथि और जन्म स्थान सम्मिलित किया जाता है।
चरण 3 — कलश स्थापना
पवित्र गोदावरी जल, आम के पत्ते और नारियल से सुसज्जित तांबे के कलश की स्थापना की जाती है। यह कलश समस्त दैवीय शक्तियों का प्रतीक है।
चरण 4 — गणेश पूजन और नवग्रह पूजन
सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा होती है, फिर नवग्रह पूजन — जिससे राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव संतुलित होते हैं।
चरण 5 — सर्प यंत्र स्थापना
चांदी से निर्मित पवित्र सर्प यंत्र की वेदी पर स्थापना होती है और दूध, शहद और पुष्पों से इसका पूजन किया जाता है।
चरण 6 — कालसर्प दोष मंत्र जाप
मुख्य मंत्र 2100 बार जाप किया जाता है:
“ॐ क्रौं नमोऽस्तु सर्पेभ्यो: काल सर्प शांति कुरु कुरु स्वाहा”
चरण 7 — हवन (यज्ञ)
विशेष समिधा, देसी घी, तिल और अन्य निर्धारित सामग्री से हवन होता है। हर आहुति वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अग्नि को समर्पित होती है।
चरण 8 — भगवान शिव का अभिषेक
भगवान त्र्यंबकेश्वर का दूध, दही, शहद और गोदावरी जल से विशेष अभिषेक होता है जिससे भगवान शिव का सीधा आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चरण 9 — पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण
अंतिम आहुति के बाद प्रसाद वितरण से पूजा सम्पन्न होती है।
कुल समय: लगभग 2.5 से 3 घंटे
वस्त्र: पुरुष — सफेद धोती, महिला — नई साड़ी (काला रंग वर्जित)
त्र्यंबकेश्वर कालसर्प पूजा के लिए कैसे तैयारी करें?
पूजा का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का पालन करें:
पूजा से एक दिन पहले
- पंडित जी से अपनी बुकिंग कम से कम 2 दिन पहले करवा लें
- रात का भोजन सात्विक करें — प्याज, लहसुन और मांसाहार से परहेज करें
- मानसिक रूप से शांत और सकारात्मक रहें
- नए सफेद वस्त्र (धोती/साड़ी) तैयार रखें
पूजा के दिन क्या पहनें
- पुरुष: नई सफेद धोती और गमछा
- महिला: नई साड़ी (काला, गहरा नीला या गहरा हरा रंग बिल्कुल न पहनें)
- सभी वस्त्र नए होने चाहिए
अपने साथ क्या लाएं
- अपनी जन्म कुंडली (यदि उपलब्ध हो)
- जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान की जानकारी
- अपना गोत्र (यदि पता हो)
- पूजा सामग्री लाने की आवश्यकता नहीं — पंडित जी सब कुछ तैयार रखते हैं
बुकिंग और जानकारी के लिए अभी संपर्क करें: 📞 8421048228
कालसर्प दोष पूजा सामग्री सूची
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा में उपयोग होने वाली सम्पूर्ण सामग्री की सूची नीचे दी गई है। पंडित कैलाश शास्त्री जी यह सब सामग्री स्वयं व्यवस्थित करते हैं — आपको कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है।
पुष्प और नैवेद्य
पुष्प माला, ढीले फूल (न्यूनतम 5 प्रकार), बिल्व (बेल) पत्र, तुलसी पत्र, कमल पुष्प और गुलाब की पंखुड़ियां।
अभिषेक के लिए तरल पदार्थ
कच्चा दूध (100 ग्राम), दही (100 ग्राम), शहद (50 ग्राम), देसी घी (1 किग्रा), गंगाजल और पवित्र गोदावरी जल।
अनाज और बीज
साबुत चावल (1 किग्रा), जौ (500 ग्राम), काले तिल (1 किग्रा), पीली सरसों और पंच मेवा (250 ग्राम)।
पूजा सामग्री
नारियल (1), सुपारी (1), जनेऊ (119), रोली (100 ग्राम), मोली (5 धागे), अगरबत्ती (1 पैकेट), कपूर, 2 बड़े मिट्टी के दीपक और 11 छोटे मिट्टी के दीपक।
अन्य सामग्री
लाल चंदन, जटामांसी, तिल का तेल (1 किग्रा), सूखा बेलगिरी, नवग्रह समिधा (1 पैकेट), आम के पत्ते, आम की लकड़ी (5 किग्रा), काली मिर्च (100 ग्राम), पीला कपड़ा और लोहे का कटोरा।
मिठाई और फल
पंच मिठाई (1 किग्रा), चीनी (500 ग्राम) और ताजे मौसमी फल।
सम्पूर्ण सामग्री आपकी पूजा बुकिंग लागत में शामिल है। आपको केवल उपस्थित होना है।
त्र्यंबकेश्वर कालसर्प दोष पूजा बुकिंग
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Frequently Asked Questions About Trimbakeshwar Kaal Sarp Dosh Puja
वैदिक विधिवत कालसर्प दोष निवारण पूजा मे 2.30 से 3 घंटे का समय लगता है।
हर माह मे पूजा के लिए विशेष दिन होते है। जिस दिन पूजा करने से पूजा का प्रभाव बड़ जाता है। पूजा का सही दिन पता करने के लिए आप अभी पंडित जी से संपर्क कर सकते है।
पंडितो की आपस मे तुलना करना सही नहीं है। अगर आप पूजा करवाना चाहते है, तो अलग अलग पंडितो से बात कर सकते है। जो आपकी भावनाओ को समझ सके उनसे पूजा करवाये।
ऑनलाइन पूजा पंडित जी द्वारा की जाएगी, जो लाइव वीडियो कॉल के माध्यम से उपलब्ध रहेंगे। आपको ऑनलाइन संकल्प लेना होगा, और पंडित जी आपकी ओर से आपका नाम और गोत्र का उपयोग करके आपकी ओर से पूजा करेंगे।
सभी सामग्री पंडित जी प्रदान करते हैं, आपको कुछ लाने की जरूरत नहीं।
पुरुषों को नई सफेद धोती और महिलाओं को नई साड़ी पहननी चाहिए। काला, गहरा नीला या गहरा हरा रंग बिल्कुल न पहनें। पूजा से पहले कुशावर्त कुंड में स्नान करना शुभ माना जाता है।
त्र्यंबकेश्वर आने से कम से कम 2 दिन पहले बुकिंग करें। अमावस्या, नाग पंचमी और महाशिवरात्रि जैसी विशेष तिथियों पर कम से कम 1 सप्ताह पहले बुकिंग करना उचित है।
हाँ, आप फोन या WhatsApp से बुकिंग कर सकते हैं।
हाँ, आप फोन या WhatsApp से बुकिंग कर सकते हैं।
Customers Reviews
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We are thoroughly satisfied with Pandit Ji. He performed the Kaal Sarp Puja with great care and arranged everything meticulously.
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The behavior and knowledge of Guru Ji were exemplary. We felt truly positive and content after completing the puja with Pandit Ji.
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I recently had a Kaal Sarp Dosh puja performed by Pandit Kailash Shastri in Trimbakeshwar. The experience was truly divine. His knowledge and the way he conducted the puja were impressive. I’ve felt a positive change since then. Highly recommend!