कालसर्प दोष पूजा तिथि व मुहूर्त मार्च 2026

त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा- मार्च 2026 की सही तिथि व समय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष का निर्माण होता है। यह दोष जीवन में बार-बार बाधाएँ, मानसिक तनाव, करियर में रुकावट और पारिवारिक अशांति का कारण बन सकता है। ऐसे में मार्च 2026 में सही तिथि और शुभ मुहूर्त में की गई कालसर्प दोष पूजा अत्यंत प्रभावकारी मानी जाती है।

यदि आप मार्च 2026 में कालसर्प दोष पूजा कराने की योजना बना रहे हैं, तो उपरोक्त शुभ तिथियों और उचित मुहूर्त में त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा कराना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। सही समय, सही विधि और श्रद्धा के साथ की गई पूजा जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

कालसर्प दोष पूजा के लिए मार्च 2026 क्यों खास है?

Kaal Sarp Puja Nashik
Kaal Sarp Dosh Nivaran Puja

मार्च 2026 में कालसर्प पूजा के लिए कई उत्तम तिथियां उपलब्ध हैं। इस महीने में होली और चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ भी हो रहा है, जो आध्यात्मिक कार्यों के लिए बहुत शक्तिशाली समय माना जाता है।

यहाँ मार्च 2026 के लिए शुभ मुहूर्त का चार्ट दिया गया है:

मार्च 2026: कालसर्प पूजा शुभ मुहूर्त चार्ट

तारीख (Date)दिनतिथि / विशेष योगमहत्व
3 मार्चमंगलवारफाल्गुन पूर्णिमा (होली)नकारात्मक ऊर्जा की शांति के लिए विशेष
8 मार्चरविवाररंग पंचमीमहाराष्ट्र में विशेष महत्व, नाग पूजा हेतु शुभ
13 मार्चशुक्रवारदशमी / एकादशीमानसिक शांति और दोष निवारण हेतु
18 मार्चबुधवारअमावस्याकालसर्प दोष शांति के लिए सबसे प्रबल दिन
19 मार्चगुरुवारचैत्र नवरात्रि प्रारंभगुड़ी पड़वा (हिंदू नववर्ष) का शुभ दिन
23 मार्चसोमवारश्री पंचमी (नवरात्रि)नाग देवता और शिव भक्ति के लिए श्रेष्ठ
27 मार्चशुक्रवारराम नवमीअत्यंत शुभ और सिद्ध मुहूर्त

ये तिथियां सामान्य पंचांग और त्रिंबकेश्वर पूजा के प्रमाणित स्रोतों से ली गई हैं। आपकी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार मुहूर्त थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए पूजा से पहले पंडित से जन्म विवरण देकर अंतिम मुहूर्त फाइनल करवाएं।

मार्च 2026 में कालसर्प पूजा क्यों करवाएं? – वसंत के मौसम में विशेष लाभ

  • मार्च में वसंत ऋतु शुरू होती है, इसलिए पूजा का फल प्रकृति की सकारात्मक ऊर्जा से बढ़ जाता है।
  • अमावस्या (19 मार्च) पर पूजा करने से दोष का प्रभाव जल्दी समाप्त होता है और जीवन में नई शुरुआत मिलती है।
  • मौसम सुहावना रहता है, यात्रा आसान और ठंडकदार होती है।
  • मार्च में मुहूर्त अधिक होने से बुकिंग और यात्रा प्लानिंग आसान रहती है।

त्रिंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की पूरी विधि क्या है?

पूजा 2-3 घंटे की होती है और निम्न चरणों में पूरी होती है:

  • रुद्राभिषेक और आशीर्वाद।
  • कुशावर्त कुंड में पवित्र स्नान और संकल्प।
  • गणेश पूजन, नवग्रह शांति।
  • राहु-केतु मंत्र जाप (2100 बार)।
  • शिवलिंग और यंत्र अभिषेक (दूध, शहद, घी से)।
  • हवन और नाग-नागिन (चांदी) विसर्जन गोदावरी में।

मार्च 2026 की अमावस्या – कालसर्प दोष शांति के लिए विशेष

मार्च माह की अमावस्या कालसर्प दोष पूजा के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। अमावस्या के दिन राहु-केतु से संबंधित दोषों की शांति जल्दी होती है, इसलिए इस दिन त्र्यंबकेश्वर में पूजा कराने का विशेष महत्व है।

कालसर्प दोष पूजा के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से है?

पूजा का प्रभाव तिथि के साथ-साथ मुहूर्त पर भी निर्भर करता है। सामान्य रूप से निम्न समय श्रेष्ठ माने जाते हैं:

प्रातः काल: सुबह 6:00 से 10:30 बजे
मध्याह्न: 11:00 से 1:30 बजे
प्रदोष काल: सूर्यास्त से पूर्व का समय

व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार मुहूर्त अलग-अलग हो सकता है, इसलिए पूजा से पहले पंडित या ज्योतिषी से परामर्श लेना उत्तम रहता है। सटीक जानकारी के लिए योग्य पंडित कैलाश शास्त्री जी से नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें।

त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा क्यों कराएँ?

  • यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है
  • गोदावरी नदी का पवित्र उद्गम स्थल
  • राहु-केतु और सर्प दोष शांति के लिए सिद्ध स्थान
  • अनुभवी वैदिक पंडितों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से पूजा

त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा कैसे कराएँ?

त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा कराने के लिए नाशिक के अनुभवी पंडित कैलाश शास्त्री जी से संपर्क करें और पूजा की पूरी जानकारी प्राप्त करें। आप पंडित जी से नाशिक पहुँचकर या वैबसाइट के माध्यम से भी संपर्क कर सकते है। नीचे दिये गए नंबर पर कॉल करें और अपनी पूजा बुक करें।

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