कालसर्प दोष पूजा मुहूर्त और तिथियां जनवरी 2026
कालसर्प दोष कुंडली का सबसे गंभीर और जीवन को जकड़ने वाला दोष है, जब राहु-केतु के बीच सभी ग्रह फंस जाते हैं। यह दोष असफलता, मानसिक तनाव, वैवाहिक बाधा, संतान समस्या और आर्थिक हानि लाता है। इसका सबसे प्रभावी और पूर्ण निवारण त्रिंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक, महाराष्ट्र) में विधि-विधान से किया जाता है।
जनवरी 2026 में वर्ष की शुरुआत में ही कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, विशेष रूप से अमावस्या (18 जनवरी 2026) को पूजा के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। शुभ मुहूर्त में त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा कराने के लिए आज ही योग्य पंडित कैलाश शास्त्री जी से संपर्क करें।
Contents
जनवरी 2026 में कालसर्प दोष पूजा के लिए मुख्य शुभ तिथियां (त्रिंबकेश्वर मुहूर्त)
विश्वसनीय पंडित कैलाश शास्त्री जी के अनुसार, जनवरी 2026 में निम्नलिखित तिथियां कालसर्प दोष निवारण पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ हैं। ये तिथियां पंचांग, तिथि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति पर आधारित हैं:
जनवरी 2026 की प्रमुख मुहूर्त तिथियां: 1, 3, 4, 5, 7, 10, 11, 12, 14, 17, 18 (अमावस्या – सबसे शुभ), 19, 21, 24, 25, 26, 28 और 31 जनवरी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या, विशेष वार, पूजा-अनुकूल तिथियाँ और पूजा के लिए चयनित हिन्दू पंचांग दिवस कालसर्प दोष पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं।
जनवरी 2026 के संभावित शुभ तिथियाँ कौन-सी है?
बहुत से पंचांग और पूजा-सूची के अनुसार ये तिथियाँ जनवरी 2026 में कालसर्प दोष पूजा के लिए शुभ मानी जा सकती हैं:
1 जनवरी 2026
3 जनवरी 2026
4 जनवरी 2026
5 जनवरी 2026
7 जनवरी 2026
10 – 12 जनवरी 2026
14 जनवरी 2026
17 – 19 जनवरी 2026 (विशेष रूप से अमावस्या – 18 जनवरी)
21 जनवरी 2026
24 – 26 जनवरी 2026
28 & 31 जनवरी 2026
इन तिथियों में 18 जनवरी (अमावस्या) को विशेष रूप से अधिक फलदायी माना जाता है। यही दिन मौनी अमावस्या भी है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से दोष शांति और आत्मशुद्धि के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है।
- सबसे विशेष दिन: 18 जनवरी 2026 (अमावस्या) – यह तिथि कालसर्प पूजा के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। अमावस्या पर पितृ तर्पण और राहु-केतु शांति का विशेष फल मिलता है। इस दिन पूजा करने से दोष का प्रभाव जल्दी कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
- अन्य महत्वपूर्ण दिन: 1, 5, 7, 11, 16, 19, 22 और 29 जनवरी (कुछ पंडितों के अनुसार ये भी उत्तम हैं)।
नोट: ये तिथियां सामान्य पंचांग और त्रिंबकेश्वर के अनुभवी पंडितों के अनुसार हैं। आपकी व्यक्तिगत कुंडली (जन्म तिथि, समय, स्थान) के आधार पर मुहूर्त थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए पूजा से पहले पंडित से कुंडली दिखाकर अंतिम मुहूर्त फाइनल करवाएं।
जनवरी 2026 में कालसर्प पूजा क्यों करवाएं? – वर्ष की शुरुआत में लाभ
- जनवरी में नया साल शुरू होता है, इसलिए पूजा से पूरे साल की बाधाएं दूर हो सकती हैं।
- अमावस्या (18 जनवरी) पर पूजा करने से पितृ दोष और कालसर्प दोष दोनों का निवारण होता है।
- सर्दियों में त्रिंबकेश्वर का मौसम सुहावना रहता है, यात्रा आसान होती है।
- जनवरी में मुहूर्त अधिक होने से बुकिंग आसानी से मिल जाती है।
त्रिंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है?
पूजा 2-3 घंटे की होती है और निम्न चरणों में पूरी होती है:
- कुशावर्त कुंड में पवित्र स्नान और संकल्प।
- गणेश पूजन, नवग्रह शांति।
- राहु-केतु मंत्र जाप (2100 बार)।
- शिवलिंग और यंत्र अभिषेक (दूध, शहद, घी से)।
- हवन और नाग-नागिन (चांदी) विसर्जन गोदावरी में।
- रुद्राभिषेक और आशीर्वाद।
क्यों खास हैं ये तिथियाँ?
अमावस्या (18 जनवरी 2026) – कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि, जब चंद्रमा नहीं होता, इसलिए राहु-केतु के प्रभाव को शांति से संतुलित माना जाता है।
अन्य तिथियाँ – पंडित और ज्योतिषी अक्सर पंडवारा पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने के शुभ योग, नक्षत्र और वार देखकर कालसर्प दोष पूजा के लिए अनुकूल तिथि चुनते हैं।
मुहूर्त का महत्व
मुहूर्त यानी पूजा का शुभ समय:
सिर्फ तारीख ही नहीं, बल्कि समय (मुहूर्त) भी पूजा के परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शुभ मुहूर्त में पूजा करने से ग्रहों की ऊर्जा संतुलित होती है और पूजा के परिणाम तीव्रता से दृष्टिगोचर होते हैं।
मुहूर्त निर्धारण में आमतौर पर निम्न कारक देखे जाते हैं: वार (दिन), नक्षत्र, योग, अभिजित मुहूर्त, राहुकाल और गूलिकाल आदि
ये सभी हिन्दू पंचांग अथवा ज्योतिष के विशेषज्ञ द्वारा तय किए जाते हैं
पूजा से पहले घर के हिंदू पंचांग, ऑनलाइन प्रचारित शुभ तिथियाँ और ज्योतिष सलाह एकत्र कर लें और एक अनुभवी पंडित से अंतिम मुहूर्त कन्फ़र्म करें। आज ही नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें और अपनी पूजा की पूरी जानकारी प्राप्त करें।