अंगारक योग पूजा त्र्यंबकेश्वर: जाने लक्षण, उपाय, विधि, खर्च
अंगारक योग हिंदू ज्योतिष शास्त्र में एक अत्यंत शक्तिशाली और उग्र ग्रह योग माना जाता है। ‘अंगारक’ शब्द का अर्थ है ‘अग्नि समान’ या ‘जलता हुआ कोयला’। यह मंगल ग्रह का ही एक प्राचीन नाम है जो उसकी अग्नि तत्व वाली प्रकृति को दर्शाता है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह राहु या केतु के साथ युति में आ जाता है, तो यह योग ‘अंगारक योग’ कहलाता है।
अंगारक योग पूजा त्र्यंबकेश्वर, नाशिक में कराने से मंगल की उग्र ऊर्जा संतुलित होती है और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
पंडित कैलाश शास्त्री जी 17+ वर्षों से त्र्यंबकेश्वर में अंगारक योग, मंगल दोष, कालसर्प दोष और पितृ दोष की पूजा संपन्न करा रहे हैं।
Contents
- 1 अंगारक योग क्या है?
- 2 अंगारक योग बनने के मुख्य कारण क्या है?
- 3 मंगल-राहु युति और मंगल-केतु युति — दोनों प्रकार
- 4 अंगारक योग के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते है?
- 5 अंगारक योग के प्रभावी उपाय कौन-कौन से है?
- 6 अंगारक योग शांति पूजा त्र्यंबकेश्वर: सबसे सरल उपाय
- 7 त्र्यंबकेश्वर में अंगारक योग पूजा क्यों कराएँ?
- 8 अंगारक योग पूजा की विधि (त्र्यंबकेश्वर) क्या है?
- 9 त्र्यंबकेश्वर में अंगारक योग पूजा का खर्च कितना है?
- 10 अंगारक योग पूजा के लाभ कौन-कौन से है?
- 11 अंगारक योग पूजा का शुभ समय क्या है?
- 12 अंगारक योग पूजा बुकिंग कैसे करें?
अंगारक योग क्या है?
जब कुंडली में मंगल ग्रह राहु या केतु के साथ किसी भी भाव में स्थित होता है, तो उसे अंगारक योग कहा जाता है। “अंगारक” शब्द का अर्थ ही अग्नि समान उग्र ऊर्जा से है। यह योग व्यक्ति को अत्यधिक साहसी बना सकता है, लेकिन यदि नियंत्रित न हो तो यही ऊर्जा जीवन में समस्याएँ भी उत्पन्न करती है।
मंगल ग्रह को ज्योतिष में ऊर्जा, साहस, पराक्रम, भूमि, वाहन, रक्त, क्रोध और युद्ध का कारक माना गया है। जब यह मंगल राहु या केतु जैसे छाया ग्रहों के साथ मिलता है, तो उसकी अग्नि तत्व वाली ऊर्जा explosive बन जाती है। राहु भ्रम, छल, विस्तार और अचानक घटनाओं का कारक है। केतु मोक्ष, अलगाव, आध्यात्मिकता और पूर्व जन्म के कर्मों का कारक है। मंगल की अग्नि और राहु-केतु की छाया जब मिलती है, तो व्यक्ति के जीवन में अत्यंत तीव्र और अप्रत्याशित परिवर्तन होते हैं।
यह योग व्यक्ति को अत्यधिक साहसी, पराक्रमी और निर्भीक बना सकता है, किंतु यदि यह नियंत्रित न हो तो यही ऊर्जा जीवन में विवाद, संघर्ष, दुर्घटना, क्रोध और अचानक आई समस्याओं का कारण बनती है। अंगारक योग में जन्मे व्यक्ति अक्सर सैनिक, पुलिस, खिलाड़ी, सर्जन, या उद्यमी बनते हैं — जहाँ साहस और तीव्र निर्णय क्षमता आवश्यक होती है।
अंगारक योग बनने के मुख्य कारण क्या है?
- मंगल और राहु की युति — प्रभाव — राहु एक छाया ग्रह है जो भ्रम, छल, विस्तार, और अचानक घटनाओं का कारक है। जब यह मंगल के साथ युति में आता है, तो मंगल की अग्नि ऊर्जा राहु के भ्रम से मिलकर explosive बन जाती है। ऐसे व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध, महत्वाकांक्षा, और विवादास्पद प्रवृत्ति होती है। वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
- मंगल और केतु की युति — प्रभाव — केतु एक छाया ग्रह है जो मोक्ष, अलगाव, आध्यात्मिकता, और पूर्व जन्म के कर्मों का कारक है। जब यह मंगल के साथ युति में आता है, तो मंगल की ऊर्जा केतु के अलगाव से मिलकर अंतर्मुखी और रहस्यमय बना देती है। ऐसे व्यक्ति में अचानक क्रोध, आत्मघाती प्रवृत्ति, और एकांतपसंदी होती है।
- पूर्व जन्म के क्रोध और हिंसक कर्म — ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अंगारक योग पूर्व जन्मों के क्रोध, हिंसा, और अन्यायपूर्ण कर्मों का फल होता है। जो व्यक्ति पूर्व जन्म में हिंसक, क्रोधी, या सैनिक प्रवृत्ति का रहा हो, उसे इस जन्म में अंगारक योग का सामना करना पड़ सकता है।
- गोचर में अंगारक योग की स्थिति — कभी-कभी जन्म कुंडली में अंगारक योग न हो, किंतु गोचर में मंगल राहु-केतु के साथ युति में आ जाता है। यह गोचरीय अंगारक योग अपने-आप में अत्यंत प्रभावशाली होता है और उस समय व्यक्ति को अत्यंत सावधान रहना चाहिए।
मंगल-राहु युति और मंगल-केतु युति — दोनों प्रकार
अंगारक योग दो प्रकार का होता है — मंगल-राहु युति और मंगल-केतु युति। दोनों में अंतर है और प्रभाव भी भिन्न होते हैं।
मंगल-राहु युति में मंगल की अग्नि ऊर्जा राहु के भ्रम और विस्तार से मिलकर व्यक्ति को अत्यंत आक्रामक, महत्वाकांक्षी और विवादास्पद बना देती है। ऐसे व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध, जल्दबाजी, और अन्यायपूर्ण व्यवहार की प्रवृत्ति होती है। वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह युति राजनीति, प्रशासन, और उद्योग जगत में सफलता दे सकती है, किंतु पारिवारिक जीवन और मानसिक शांति में हानि करती है।
मंगल-केतु युति में मंगल की ऊर्जा केतु के अलगाव और आध्यात्मिकता से मिलकर व्यक्ति को अंतर्मुखी, तपस्वी और रहस्यमय बना देती है। ऐसे व्यक्ति में अचानक क्रोध, अनियंत्रित आवेश, और आत्मघाती प्रवृत्ति हो सकती है। यह युति आध्यात्मिक साधना, तंत्र, और गूढ़ विद्याओं में सफलता दे सकती है, किंतु सामान्य जीवन में अलगाव और एकांतपसंदी लाती है।
अंगारक योग के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते है?
स्वभाव और मानसिक प्रभाव
- अत्यधिक क्रोध और चिड़चिड़ापन
- जल्दबाजी में निर्णय लेना
- आक्रामक व्यवहार
करियर और धन पर प्रभाव
- नौकरी या व्यवसाय में विवाद
- बार-बार बदलाव या अस्थिरता
- भूमि, मशीन या तकनीकी क्षेत्र में जोखिम
वैवाहिक और पारिवारिक प्रभाव
- वैवाहिक जीवन में तनाव
- झगड़े और गलतफहमियाँ
- परिवार में अशांति
स्वास्थ्य पर प्रभाव
- रक्त से जुड़ी समस्याएँ
- चोट, दुर्घटना या ऑपरेशन की संभावना
- उच्च रक्तचाप
अंगारक योग के प्रभावी उपाय कौन-कौन से है?
मंगल मंत्र जाप
मंगलवार के दिन 108 बार जाप करें:
“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”
शिव और हनुमान उपासना
- “ॐ नमः शिवाय” का नियमित जाप
- मंगलवार को हनुमान चालीसा पाठ
दान और सेवा
- लाल मसूर, तांबा, गुड़ का दान
- रक्तदान या सेवा कार्य
- क्रोध पर नियंत्रण
संयमित जीवनशैली
- जल्दबाजी से बचें
- अहिंसा और धैर्य अपनाएँ
- नशे और अनावश्यक विवाद से दूर रहें।
अंगारक योग शांति पूजा त्र्यंबकेश्वर: सबसे सरल उपाय
शास्त्रों में कहा गया है कि त्र्यंबकेश्वर में किए गए अंगारक योग पूजा का फल अन्य स्थानों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। भगवान शिव के महामृत्युंजय रूप की उपस्थिति इस स्थान को अंगारक योग निवारण के लिए अत्यंत शक्तिशाली बनाती है। ऐसी स्थिति में त्र्यंबकेश्वर में अंगारक योग पूजा कराना एक शास्त्रसम्मत और प्रभावी उपाय माना जाता है।
गोदावरी नदी और कुशावर्त कुंड — त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड से गोदावरी नदी का उद्गम होता है। शास्त्रों में कुशावर्त कुंड को तीर्थराज की संज्ञा दी गई है। अंगारक योग पूजा से पहले इस कुंड में स्नान करने से व्यक्ति की समस्त नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाती हैं और पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। गोदावरी नदी का पवित्र जल मंगल और राहु दोनों को शांत करने में सहायक माना जाता है।
त्र्यंबकेश्वर में अंगारक योग पूजा क्यों कराएँ?
त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है और यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ भगवान शिव त्रिमुखी रूप में विराजमान हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं।
- भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक
- गोदावरी नदी का पवित्र उद्गम स्थल
- ग्रह दोष शांति के लिए सिद्ध क्षेत्र
- अनुभवी वैदिक पंडितों द्वारा विधिपूर्वक पूजा
अंगारक योग पूजा की विधि (त्र्यंबकेश्वर) क्या है?
- संकल्प और गणेश पूजा — पंडित जी भक्त के नाम, गोत्र, जन्म तिथि और पूजा के उद्देश्य के साथ संकल्प लेते हैं। इसके बाद गणेश पूजा होती है। ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है।
- नवग्रह शांति — नवग्रह पूजा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की शांति के लिए मंत्र जाप किया जाता है।
- मंगल, राहु और केतु का आवाहन — अंगारक योग पूजा का मुख्य अंग मंगल, राहु और केतु तीनों का आवाहन है। मंगल के लिए ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः, राहु के लिए ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः, और केतु के लिए ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः मंत्र का जाप किया जाता है।
- विशेष मंत्र जाप — अंगारक योग निवारण हेतु विशेष मंत्र जाप किया जाता है। मुख्य मंत्र है ॐ अंगारकाय नमः। महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप किया जाता है।
- हवन और आहुति — हवन कुंड में पवित्र अग्नि प्रज्वलित की जाती है। घी, बिल्व पत्र, चंदन, लाल चंदन, हवन समग्री और अन्य पदार्थों की आहुतियां दी जाती हैं।
- पूर्णाहुति और शिव आशीर्वाद — अंत में पूर्णाहुति दी जाती है जिसमें नारियल, अक्षत, फल और पंचामृत अग्नि में समर्पित किए जाते हैं। और आशीर्वाद दिया जाता है।
त्र्यंबकेश्वर में अंगारक योग पूजा का खर्च कितना है?
- सामान्य पूजा — ₹2,500 से ₹3,500 तक। एक पंडित, बेसिक सामग्री, सामूहिक हॉल में पूजा। समय 2-3 घंटे। यह उन भक्तों के लिए आदर्श है जो कम खर्च में पूजा करना चाहते हैं।
- व्यक्तिगत पूजा — ₹3,500 से ₹5,000 तक। 1-2 पंडित, अच्छी सामग्री, अलग पूजा स्थल। समय 3-4 घंटे। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो व्यक्तिगत ध्यान चाहते हैं।
- विशेष पूजा — ₹5,000 से ₹7,000+ तक। 3-5 पंडित, प्रीमियम सामग्री, विशेष हवन। समय 4-5 घंटे। यह गंभीर अंगारक योग के लिए अनुशंसित है।
खर्च में शामिल — पंडित दक्षिणा, पूजा सामग्री जैसे दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बिल्व पत्र, चंदन, लाल चंदन, फूल, फल, हवन समग्री, कुशावर्त स्नान की व्यवस्था, प्रसाद जैसे पंचामृत, नारियल, रक्षा सूत्र।
पूजा अवधि: लगभग 2 से 3 घंटे
अंगारक योग पूजा के लाभ कौन-कौन से है?
- क्रोध और नकारात्मक ऊर्जा में कमी
- वैवाहिक और पारिवारिक शांति
- करियर में स्थिरता
- साहस और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि
- दुर्घटना और विवाद से सुरक्षा
अंगारक योग पूजा का शुभ समय क्या है?
- मंगलवार — मंगल का दिन। मंगलवार अंगारक योग पूजा के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। प्रत्येक मंगलवार पूजा करना लाभदायक है। विशेष रूप से श्रावण मास के मंगलवार अत्यंत फलदायी होते हैं।
- अमावस्या — पितृ दोष और अंगारक योग निवारण हेतु। अमावस्या के दिन पितरों की शांति और अंगारक योग निवारण दोनों का लाभ मिलता है। प्रत्येक माह की अमावस्या को पूजा करना शुभ माना जाता है।
- श्रावण मास — शिव पूजा का पवित्र महीना। श्रावण मास में प्रतिदिन अंगारक योग पूजा करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। विशेष रूप से श्रावण के मंगलवार और श्रावण शिवरात्रि को पूजा का विशेष महत्व है। 2026 में श्रावण मास जुलाई-अगस्त में होगा।
- मंगल-राहु युति के दिन — जब गोचर में मंगल और राहु युति में हों। इस समय अंगारक योग पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। 2026 में मंगल-राहु युति की तिथियां ज्योतिषीय गणना से निर्धारित होंगी।
अंगारक योग पूजा बुकिंग कैसे करें?
- कुंडली जाँच द्वारा योग की पुष्टि
- शुभ तिथि और समय तय करना
- अनुभवी पंडित या पूजा सेवा केंद्र से संपर्क
- विशेष दिनों में अग्रिम बुकिंग आवश्यक।
यदि आप भी इस दोष से पीड़ित है तो त्र्यंबकेश्वर में अंगारक दोष निवारण पूजा वहाँ के अनुभवी पंडित कैलाश शास्त्री जी की उपस्थिति में कराएँ, पंडित जी को पूजा-अनुष्ठान में 15 वर्षो से अधिक अनुभव प्राप्त है।
Leave feedback about this