राहु केतु जाप पूजा त्र्यंबकेश्वर

राहु केतु जाप पूजा त्र्यंबकेश्वर– जाने विधि, लाभ और खर्च

कुंडली में राहु-केतु का दोष हो तो ज़िंदगी के हर मोड़ पर रुकावट आती है — नौकरी हो, शादी हो या व्यापार। लाखों लोग इस दोष के निवारण के लिए त्र्यंबकेश्वर आते हैं और यहाँ राहु केतु जाप पूजा करवाते हैं।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि यह पूजा क्यों होती है, कैसे होती है, कितने में होती है — और इसे करवाने का सही समय क्या है।

राहु केतु दोष होता क्या है?

Rahu Ketu Dosh
राहु केतु जाप पूजा त्र्यंबकेश्वर– जाने विधि, लाभ और खर्च

राहु और केतु को ज्योतिष में छाया ग्रह कहा जाता है। ये भौतिक ग्रह नहीं हैं बल्कि चंद्रमा के उत्तर और दक्षिण नोड हैं। लेकिन कुंडली पर इनका असर बेहद गहरा होता है।

जब ये ग्रह अशुभ भाव में हों — खासकर 6, 8 या 12वें भाव में — या जब इनके बीच बाकी सारे ग्रह आ जाएं (काल सर्प दोष), तो जातक के जीवन में ये समस्याएं सामने आती हैं:

  • कड़ी मेहनत के बाद भी करियर में आगे न बढ़ना
  • शादी में बार-बार देरी या रिश्ते टूटना
  • पैसा आना लेकिन टिकना नहीं
  • बिना वजह डर, बुरे सपने और मानसिक बेचैनी
  • परिवार में लगातार कलह

अगर ये लक्षण लंबे समय से हैं तो किसी अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली ज़रूर दिखाएं।

त्र्यंबकेश्वर में ही क्यों करें यह पूजा?

यह सवाल हर किसी के मन में आता है।

त्र्यंबकेश्वर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और गोदावरी नदी का उद्गम स्थल है। यहाँ का शिवलिंग त्रिमुखी है — ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का एकीकृत स्वरूप। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ही राहु और केतु के नियंत्रक हैं। इसीलिए उनके प्रमुख ज्योतिर्लिंग पर की गई पूजा का असर सबसे तेज़ और गहरा होता है।

इसके अलावा यहाँ के पंडित पीढ़ियों से वेदोक्त विधि से पूजा करते आ रहे हैं। यह परंपरा और यह स्थान मिलकर इस पूजा को विशेष बनाते हैं।

राहु केतु जाप पूजा की सम्पूर्ण विधि

Rahu Ketu Jap Puja Trimbakeshwar
राहु केतु जाप पूजा त्र्यंबकेश्वर– जाने विधि, लाभ और खर्च

यह पूजा 3 से 5 घंटे में पूर्ण होती है। नीचे इसके मुख्य चरण दिए गए हैं:

1. कुशावर्त कुंड में स्नान और संकल्प पूजा शुरू होने से पहले यजमान मंदिर परिसर के पवित्र कुशावर्त कुंड में स्नान करते हैं। फिर पंडित जी संकल्प दिलाते हैं जिसमें आपका नाम, गोत्र, जन्म तिथि और पूजा का उद्देश्य शामिल होता है।

2. गणेश पूजन और नवग्रह स्थापना हर शुभ कार्य की तरह यहाँ भी पहले गणपति की पूजा होती है। इसके बाद नवग्रहों की स्थापना होती है। राहु के लिए काले तिल, उड़द और नीला वस्त्र चढ़ाया जाता है। केतु के लिए कुश, बहुरंगी वस्त्र और तिल का तेल।

3. 18,000 राहु जाप और 17,000 केतु जाप यही इस पूजा का मूल है। पंडित दल मिलकर राहु का मंत्र 18,000 बार और केतु का मंत्र 17,000 बार जपता है। यह जाप माला से होता है और पूरे विधि-विधान के साथ।

4. हवन जाप के दशांश (10वें भाग) के बराबर आहुतियाँ अग्नि में दी जाती हैं। इसमें काले तिल, गुग्गुल, लोहबान और विशेष समिधाएं उपयोग होती हैं। हवन की अग्नि दोष की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है।

5. रुद्राभिषेक और आरती अंत में भगवान त्र्यंबकेश्वर का रुद्राभिषेक होता है, आरती होती है और प्रसाद वितरण के साथ पूजा संपन्न होती है।

राहु और केतु के जाप मंत्र

राहु का बीज मंत्र:

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों स: राहवे नम: (Om Bhraam Bhreem Bhroum Sah Rahave Namah)

अर्थ: मैं भ्रम और माया के स्वामी राहु को नमन करता हूँ। उनकी अशुभ ऊर्जा शांत हो और मुझ पर उनकी कृपा हो।

केतु का बीज मंत्र:

ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रों स: केतवे नम: (Om Straam Streem Stroum Sah Ketave Namah)

अर्थ: मैं मोक्षदाता केतु को प्रणाम करता हूँ। मेरे पूर्वजन्म के पाप नष्ट हों और मुझे सन्मार्ग मिले।

घर पर रोज़ाना इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से राहु-केतु की पीड़ा में कमी आती है। रुद्राक्ष की माला से जाप सबसे प्रभावशाली माना जाता है।

पूजा के लाभ

राहु केतु जाप पूजा से मुख्य रूप से ये लाभ देखे जाते हैं:

  • काल सर्प दोष का प्रभाव कम होना
  • रुके हुए करियर और व्यापार में गति आना
  • विवाह के योग बनना और दाम्पत्य जीवन में सुधार
  • आर्थिक स्थिरता — धन का बिना कारण जाना रुकना
  • मानसिक शांति और नींद में सुधार
  • संतान सुख में आने वाली बाधाओं का दूर होना
  • कोर्ट-कचहरी के मामलों में अनुकूल परिणाम
  • विदेश जाने के इच्छुक जातकों के लिए विशेष लाभकारी

शुभ मुहूर्त — कब करवाएं यह पूजा?

राहु केतु पूजा किसी भी दिन करवाई जा सकती है, लेकिन इन दिनों इसका फल विशेष रूप से अधिक होता है:

शुभ दिन / समयविशेषता
अमावस्यासबसे शक्तिशाली दिन, हर महीने उपलब्ध
पूर्णिमातीव्र फल मिलता है
शनिवारराहु-शनि का संबंध होने से शुभ
राहु कालरोज़ाना का 90 मिनट का विशेष समय
सूर्य/चंद्र ग्रहणफल हज़ार गुना माना जाता है
नाग पंचमीराहु-केतु और नाग देवता दोनों की कृपा

पूजा का समय: त्र्यंबकेश्वर में सुबह 6:30 बजे से शुरुआत होती है। सुबह का समय सबसे उत्तम है।

पूजा का खर्च

पूजा का प्रकारजाप संख्याखर्च (अनुमानित)समय
लघु पूजा1,008 जाप₹5,100 – ₹7,1001–2 घंटे
मध्यम पूजा5,000 जाप₹9,100 – ₹11,0002–3 घंटे
पूर्ण जाप पूजा18,000 + 17,000₹15,100 – ₹21,0004–5 घंटे
सम्पूर्ण अनुष्ठानपूर्ण + ब्रह्मभोज₹25,000 – ₹51,000पूरा दिन

खर्च में पूजा सामग्री और पंडित दक्षिणा शामिल है। यात्रा और ठहरने का खर्च अलग रहेगा।

पूजा से पहले ये तैयारी करें

  • पूजा से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें — प्याज, लहसुन और मांस-मदिरा से बचें।
  • पूजा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर कुशावर्त कुंड में स्नान करें।
  • अपना नाम, गोत्र और जन्म तिथि पहले से पंडित जी को बता दें।
  • पूजा के दौरान मोबाइल बंद रखें और पूरे मन से भाग लें।
  • पूजा के बाद 40 दिनों तक रोज़ 108 बार मंत्र जाप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या पूजा के लिए पहले से बुकिंग ज़रूरी है? हाँ, खासकर अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण जैसे विशेष दिनों पर। सामान्य दिनों में बिना बुकिंग के भी पूजा हो जाती है।

क्या पूरा परिवार साथ बैठ सकता है? हाँ। पूरे परिवार का एक ही पूजा में लाभ मिल सकता है। मुख्य यजमान और उनकी पत्नी का साथ होना उत्तम माना जाता है।

महिलाएं यह पूजा करवा सकती हैं? हाँ, रजस्वला अवस्था को छोड़कर कोई भी महिला यह पूजा करवा सकती है।

यह पूजा कितनी बार करवानी चाहिए? राहु-केतु की महादशा या अंतर्दशा में एक बार ज़रूर करवाएं। इसके अलावा हर 18 महीने में एक बार नियमित करवाना शुभ रहता है क्योंकि राहु-केतु हर डेढ़ साल में राशि बदलते हैं।

त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुँचें? नासिक से त्र्यंबकेश्वर लगभग 28 किमी दूर है। नासिक रोड रेलवे स्टेशन नजदीकी स्टेशन है। मुंबई से सड़क मार्ग से करीब 165 किमी। नासिक से टैक्सी और बसें आसानी से मिल जाती हैं।

त्र्यंबकेश्वर में राहु केतु जाप पूजा करवाने का निर्णय अगर आप सच्ची श्रद्धा से लेते हैं, तो यह पूजा निश्चित रूप से जीवन में बदलाव लाती है। जहाँ दुनिया के उपाय काम न करें, वहाँ भगवान शिव की शरण में आना ही सबसे बड़ा उपाय है।

ॐ नमः शिवाय 🙏

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