सूर्य-केतु ग्रहण दोष क्या है? जाने कारण, प्रभाव, उपाय और पूजा विधि
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जीवन-ऊर्जा, आत्मबल, प्रतिष्ठा और पिता का प्रतीक माना जाता है, जबकि केतु को वैराग्य, पूर्व जन्म के संस्कार और आध्यात्मिकता का कारक ग्रह कहा गया है। जब जन्म कुंडली में सूर्य और केतु की युति या परस्पर दृष्टि बनती है, तब सूर्य-केतु ग्रहण दोष उत्पन्न होता है। यह दोष व्यक्ति…