सावन 2026 में कालसर्प पूजा त्र्यंबकेश्वर: मुहूर्त, तिथियाँ
क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है कि जीवन में सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है? मेहनत पूरी करते हैं, पर फल कहीं दिखाई नहीं देता। रिश्ते बनते हैं, टूट जाते हैं। धन आता है, रुकता नहीं। नींद आती है, पर मन नहीं भरता। अगर यह सब आपके साथ हो रहा है, तो आपकी कुंडली में कालसर्प दोष हो सकता हैं। और इसे शांत करने का सबसे प्रभावी समय आने वाला है — सावन 2026।
हिंदू पंचांग का श्रावण मास, जिसे हम सावन के नाम से भी जानते हैं, भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र माहों में से एक है। इस मास की हर तिथि, हर क्षण शिव कृपा से परिपूर्ण माना जाता है। परंतु ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से देखें तो सावन का महत्व केवल भक्ति तक सीमित नहीं रह जाता।
जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु और केतु की अक्ष पर सभी ग्रह बंद होकर कालसर्प दोष का निर्माण करते हैं, उनके लिए सावन का महीना एक दिव्य उपचार का माध्यम बन जाता है। विशेष रूप से जब कालसर्प दोष पूजा त्र्यंबकेश्वर में संपन्न होती है, जो नासिक के पवित्र गोदावरी तट पर स्थित है।
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Contents
- 1 सावन 2026 में कालसर्प दोष पूजा के शुभ मुहूर्त और तिथियाँ कौन-सी है?
- 2 नगंचमी 2026
- 3 श्रावण सोमवार 2026
- 4 श्रावण शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि) 2026
- 5 हरियाली अमावस्या
- 6 अन्य मुहूर्त 2026
- 7 सावन में कालसर्प दोष पूजा का महत्व क्या होता है? क्यो जरूरी यह पूजा
- 8 त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा कराना क्यों जरूरी है?
- 9 त्र्यंबकेश्वर में सावन में कालसर्प पूजा की विधि क्या है?
- 10 सावन में कालसर्प पूजा के बाद मिलने वाले लाभ कौन-से है?
- 11 त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग कैसे करें?
सावन 2026 में कालसर्प दोष पूजा के शुभ मुहूर्त और तिथियाँ कौन-सी है?
सावन 2026 में त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी सिद्ध होंगी। सावन 2026 की शुरुआत जुलाई 2026 से होने वाली है। इस माह में लगभग 17 अगस्त 2026 तक श्रावण की तिथियाँ रहेंगी। इस बीच कई ऐसी तिथियाँ हैं जिन्हें कालसर्प दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
नगंचमी 2026
सबसे पहले बात करें नाग पंचमी की, जो सावन में आने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। सावन 2026 में नाग पंचमी लगभग 23 जुलाई 2026 के आसपास पड़ने की उम्मीद है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा का विशेष विधान है और चूँकि कालसर्प दोष का संबंध सीधे नाग योनि और राहु-केतु से है, इसलिए इस दिन त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा का फल अत्यधिक होता है।
इस दिन पंचमी तिथि और नक्षत्रों का संयोग पूजा को और भी प्रबल बनाता है। यदि नाग पंचमी पर रोहिणी या अश्लेषा नक्षत्र का संयोग बनता है, तो यह मुहूर्त और भी दिव्य हो जाता है।
श्रावण सोमवार 2026
इसके बाद सावन के सोमवार का विशेष महत्व है। सावन 2026 में लगभग चार से पाँच सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार लगभग 21 जुलाई 2026, दूसरा 28 जुलाई 2026, तीसरा 4 अगस्त 2026, और चौथा 11 अगस्त 2026 के आसपास आएगा। सोमवार भगवान शिव का दिन है और सावन का सोमवार तो शिव उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना ही जाता है। त्र्यंबकेश्वर में इन सोमवारों को कालसर्प दोष पूजा के लिए चुना जा सकता है।
विशेष रूप से प्रथम सावन सोमवार और तृतीय सावन सोमवार पर पूजा का फल अधिक माना जाता है क्योंकि इन दिनों शिव की उपासना का प्रारंभिक और मध्य क्रम होता है जो ग्रहीय बंधनों को खोलने में अधिक सक्षम होता है।
श्रावण शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि) 2026
श्रावण शिवरात्रि जो कि सावन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, वह भी इस माह की एक अत्यंत शक्तिशाली तिथि है। सावन 2026 में यह शिवरात्रि लगभग 31 जुलाई 2026 के आसपास होगी। शिवरात्रि के दिन त्र्यंबकेश्वर में रुद्राभिषेक के साथ कालसर्प दोष निवारण पूजा कराने से राहु-केतु की जो नकारात्मक शक्ति होती है।
वह शिव की तांडव शक्ति के समक्ष विलीन हो जाती है। इस रात्रि में जागरण और मंत्र जप का विशेष फल है। यदि शिवरात्रि के दिन प्रदोष काल भी बन रहा हो, तो यह मुहूर्त सोने पर सुहागा जैसा हो जाता है।
श्रावण पूर्णिमा जो रक्षाबंधन के रूप में भी मनाई जाती है, लगभग 14 अगस्त 2026 को पड़ने की संभावना है। पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रबल होता है और चंद्रमा मन का कारक है। कालसर्प दोष से पीड़ित जातक का मन अक्सर अशांत रहता है। पूर्णिमा पर त्र्यंबकेश्वर में पूजा कराने से मानसिक शांति के साथ-साथ चंद्रमा की कृपा भी प्राप्त होती है जो राहु-केतु के प्रभाव से उत्पन्न मानसिक अवसाद को दूर करने में सहायक होती है।
हरियाली अमावस्या
इनके अतिरिक्त सावन में आने वाली हरियाली अमावस्या या श्रावण अमावस्या भी पितृ कर्म और कालसर्प दोष से जुड़े होने के कारण महत्वपूर्ण होती है। सावन 2026 में यह अमावस्या लगभग 8 अगस्त 2026 के आसपास हो सकती है। इस दिन पितृ तर्पण के साथ कालसर्प पूजा कराने से पितृ दोष और कालसर्प दोष दोनों का निवारण एक साथ हो जाता है। यह संयोग वर्षभर में केवल सावन में ही संभव हो पाता है जब अमावस्या शिव के मास में पड़ती है।
अन्य मुहूर्त 2026
प्रतिदिन का मुहूर्त भी महत्वपूर्ण है। त्र्यंबकेश्वर में पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त अर्थात् सुबह लगभग चार बजे से छह बजे के बीच का समय सर्वोत्तम माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो प्रातःकाल छह बजे से नौ बजे तक का समय भी शुभ है।
प्रदोष काल जो सायंकाल लगभग चार बजे से सात बजे तक होता है, वह भी शिव पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। सावन में प्रदोष काल का महत्व और भी बढ़ जाता है। अतः यदि आप सावन 2026 में त्र्यंबकेश्वर जा रहे हैं, तो इन तिथियों और मुहूर्तों को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा की योजना बनाएँ।
अंतिम निर्णय से पूर्व एक बार स्थानीय पंचांग या अनुभवी ज्योतिषाचार्य से तिथि और मुहूर्त का सत्यापन अवश्य करा लें क्योंकि क्षेत्रीय विभिन्नताओं के कारण तिथियों में एक-दो दिन का अंतर हो सकता है।
सावन में कालसर्प दोष पूजा का महत्व क्या होता है? क्यो जरूरी यह पूजा
कालसर्प दोष एक ऐसा ज्योतिषीय संयोग है जो व्यक्ति के जीवन में बाधाएँ उत्पन्न करता है। चाहे वह विवाह में बार-बार आने वाली रुकावटें हों, धन की अनावश्यक व्यय प्रवृत्ति हो, शारीरिक रोग हों, मानसिक अवसाद हो, या करियर में अप्रत्याशित गिरावट, ये सभी कालसर्प दोष के प्रभाव के अंतर्गत आते हैं।
- सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय माह माना जाता है
- इस माह में शिव उपासना का फल सामान्य माह से 10 गुना अधिक होता है
- कालसर्प दोष का मूल राहु-केतु है, जो छाया ग्रह हैं
- शिव ही एकमात्र देवता हैं जो काल के भी काल हैं
- राहु-केतु की पीड़ा शिव कृपा से शीघ्र शांत होती है
- सावन में मंत्र जप, तप और हवन अत्यंत फलदायी माने गए हैं।
शिव पुराण की मान्यता के अनुसार भगवान शिव ही एकमात्र देवता हैं जो काल के भी काल हैं और जिनकी कृपा से राहु-केतु की पीड़ा शीघ्र शांत होती है। सावन भगवान शिव का प्रिय मास है। इस माह में शिव की उपासना का जो प्रभाव होता है वह अन्य किसी भी माह की अपेक्षा कई गुणा अधिक होता है।
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा कराना क्यों जरूरी है?
भारत में कालसर्प दोष पूजा के लिए कई स्थान प्रसिद्ध हैं, परंतु त्र्यंबकेश्वर का स्थान सबसे ऊपर है। इसका कारण केवल धार्मिक मान्यता मात्र नहीं है, यहाँ की भौगोलिक और आध्यात्मिक विशिष्टताएँ भी हैं। त्र्यंबकेश्वर में स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहीं पर पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम हुआ है, जिसे गंगा के समान ही पापनाशिनी माना जाता है।
सावन के महीने में त्र्यंबकेश्वर में जो भीड़ उमड़ती है, वह केवल शिव के दर्शनों के लिए नहीं, अपितु कालसर्प मुक्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं की भी होती है। यहाँ की वायु में ऐसा परिवर्तन महसूस होता है मानो प्रकृति स्वयं उन ग्रहीय बंधनों को खोलने में सहायक हो। जब आप त्र्यंबकेश्वर में सावन की फुहारों के बीच गोदावरी के किनारे बैठकर कालसर्प मंत्रों का जप करते हैं, तो वह अनुभव शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता।
त्र्यंबकेश्वर में सावन में कालसर्प पूजा की विधि क्या है?
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की विधि अन्य स्थानों की अपेक्षा कुछ विशिष्ट होती है। यहाँ पूजा का संपन्न होना केवल मंत्रोच्चार तक सीमित नहीं रहता। जब आप सावन में त्र्यंबकेश्वर पहुँचते हैं, तो सबसे पहले गोदावरी के घाट पर स्नान करना चाहिए।
गोदावरी घाट पर स्नान
- पूजा से पहले गोदावरी में स्नान अनिवार्य
- सावन में वर्षा का जल और नदी का जल मिलकर अत्यंत पवित्र होता है
- यह स्नान शरीर को नहीं, ग्रहों की अशुद्धियों को धोता है
संकल्प
- पुरोहित जी के साथ संकल्प लिया जाता है
- अपना नाम, गोत्र, राशि, नक्षत्र और जन्म विवरण बताया जाता है
- यह वचन भगवान त्र्यंबकेश्वर के समक्ष रखा जाता है
कालसर्प यंत्र स्थापना
- ताम्र या पीतल के यंत्र की स्थापना
- पंचामृत से स्नान — गोदावरी जल, दूध, दही, शहद, घी
- नाग देवता की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है
मंत्र जप
- राहु मंत्र — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
- केतु मंत्र — ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
- महामृत्युंजय मंत्र — ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्
- न्यूनतम 10,000 बार जप अनिवार्य
- यदि संभव हो तो 1,00,000 बार जप श्रेष्ठ
हवन
- पलाश, बेल और खैर की लकड़ी का प्रयोग
- काले तिल, घी, नारियल की गरी की आहुतियाँ
- अग्नि कुंड में राहु-केतु की आहुतियाँ दी जाती हैं
- न्यूनतम 108 आहुतियाँ, अधिकतम 1008
रुद्राभिषेक
- त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग पर रुद्राभिषेक
- दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं
- रुद्राष्टाध्यायी या लघुरुद्र का पाठ
- यह अभिषेक कालसर्प बंधन को तोड़ता है
पूर्णाहुति और कलावा
- हवन के बाद पूर्णाहुति
- रक्षा कलावा या मंगल सूत्र प्रसादस्वरूप
- गोदावरी में दीपदान और नारियल प्रवाहित करना
सावन में कालसर्प पूजा के बाद मिलने वाले लाभ कौन-से है?
- नींद में सुधार, भयावने सपने कम होना
- मन में हल्कापन और शांति का अनुभव
- शारीरिक थकान और अकेलापन दूर होना
- आर्थिक लाभ और अटके धन की प्राप्ति
- कुंडली से कालसर्प दोष का स्थायी निवारण
- भूमि, भवन और वाहन की प्राप्ति
- पितृ कृपा और वंश वृद्धि
- आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की ओर अग्रसरता।
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग कैसे करें?
क्या आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है? क्या आप सावन 2026 में त्र्यंबकेश्वर जाकर इस दोष की शांति कराना चाहते हैं? हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्य आपकी कुंडली का विश्लेषण कर सही मुहूर्त और तिथि का चयन करने में आपकी सहायता करेंगे।
त्र्यंबकेश्वर में शुद्ध वैदिक विधि से कालसर्प दोष निवारण पूजा संपन्न कराने हेतु आज ही संपर्क करें और अपने जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का समाधान पाएँ।
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