जून 2026 में कालसर्प दोष पूजा मुहूर्त

कालसर्प दोष पूजा 2026: जून महीने की शुभ तिथियां और मुहूर्त

कालसर्प दोष पूजा बहुत ही शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है जो व्यक्ति के जीवन से राहु-केतु के दुष्प्रभावों को दूर करता है। जून 2026 में विशेष रूप से 15 जून (गुरु पूर्णिमा) और 29 जून (शिवरात्रि) इस पूजा के लिए अत्यंत शुभ तिथियां हैं।

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है और आप जीवन में असफलता, आर्थिक संकट या स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हो रहे हैं, तो इन शुभ तिथियों पर पूजा अवश्य करवाएं। पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा निश्चित रूप से फलदायी होती है। विशेष रूप से त्र्यंबकेश्वर की कालसर्प दोष पूजा प्रभावशाली मानी जाती है।

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कालसर्प दोष: जाने विशेषता और महत्व क्या है?

कालसर्प दोष ज्योतिष शास्त्र में एक गंभीर दोष माना जाता है जो व्यक्ति की कुंडली में तब उत्पन्न होता है जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में स्थित हो जाते हैं। यह दोष व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार की बाधाएं, संघर्ष और असफलताएं लाता है।

कालसर्प दोष के प्रमुख प्रभाव:

  • करियर में रुकावट – नौकरी में तरक्की नहीं होना
  • आर्थिक संकट – धन की हानि और कर्ज की समस्या
  • वैवाहिक जीवन में कठिनाइयां – संतान प्राप्ति में देरी
  • स्वास्थ्य समस्याएं – अज्ञात रोग और मानसिक तनाव
  • कानूनी विवाद – अदालती मामलों में फंसना

कालसर्प दोष पूजा क्यों आवश्यक है?

कालसर्प दोष पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है जो इस दोष के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए और जीवन में शांति लाने के लिए किया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से त्र्यंबकेश्वर (नासिक) और उज्जैन में की जाती है, क्योंकि ये स्थान इस पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ माने गए हैं।

जून 2026 में कालसर्प दोष पूजा की शुभ तिथियां कौन-कौन सी है?

जून 2026 में कालसर्प दोष पूजा के लिए कई शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। इन तिथियों का चुनाव पंचांग और ग्रह स्थिति के आधार पर किया गया है। त्र्यंबकेश्वर मे कालसर्प दोष पूजा की शुभ तिथियां निम्नानुसार है:

जून 2026 की प्रमुख पूजा तिथियां:

5 जून 2026 (शुक्रवार) – शुक्ल पक्ष पंचमी

  • मुहूर्त: प्रातः 7:30 से 11:45 बजे तक
  • विशेषता: गुरुवार के बाद शुक्रवार का दिन अत्यंत शुभ
  • नक्षत्र: मृगशिरा नक्षत्र – बुद्धि और विवेक में वृद्धि
  • योग: सिद्धि योग – सभी कार्यों में सफलता

11 जून 2026 (गुरुवार) – शुक्ल पक्ष एकादशी

  • मुहूर्त: प्रातः 6:15 से 10:30 बजे तक
  • विशेषता: एकादशी तिथि – भगवान विष्णु की विशेष कृपा
  • नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र – यश और कीर्ति में वृद्धि
  • योग: वृद्धि योग – धन-धान्य में वृद्धि

15 जून 2026 (सोमवार) – पूर्णिमा

  • मुहूर्त: प्रातः 5:45 से 9:15 बजे तक
  • विशेषता: गुरु पूर्णिमा – आध्यात्मिक शिक्षा और ज्ञान का दिन
  • नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा नक्षत्र – नेतृत्व क्षमता में वृद्धि
  • योग: ध्रुव योग – स्थिरता और दृढ़ संकल्प

22 जून 2026 (सोमवार) – कृष्ण पक्ष सप्तमी

  • मुहूर्त: प्रातः 6:00 से 11:00 बजे तक
  • विशेषता: सोमवार – भगवान शिव का दिन, कालसर्प दोष के लिए सर्वोत्तम
  • नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र – सृजनात्मकता और विकास
  • योग: शुभ योग – मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम

29 जून 2026 (सोमवार) – कृष्ण पक्ष चतुर्दशी

  • मुहूर्त: प्रातः 5:30 से 9:45 बजे तक
  • विशेषता: मासिक शिवरात्रि – भगवान शिव की विशेष आराधना
  • नक्षत्र: ज्येष्ठा नक्षत्र – कष्टों से मुक्ति
  • योग: वरीयान योग – उच्च कोटि का शुभ योग

जून 2026 में सर्वश्रेष्ठ पूजा मुहूर्त कौन-कौन से है?

प्रातःकालीन मुहूर्त (Morning Muhurat)

तिथिदिनमुहूर्त समयविशेष लाभ
5 जूनशुक्रवार7:30 AM – 11:45 AMव्यापारिक सफलता
11 जूनगुरुवार6:15 AM – 10:30 AMशिक्षा और ज्ञान
15 जूनसोमवार5:45 AM – 9:15 AMआध्यात्मिक उन्नति
22 जूनसोमवार6:00 AM – 11:00 AMपारिवारिक सुख
29 जूनसोमवार5:30 AM – 9:45 AMरोग मुक्ति

अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurat – सर्वश्रेष्ठ)

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है:

  • समय: लगभग 11:45 AM से 12:30 PM
  • विशेषता: भगवान विष्णु की पूजा का समय
  • लाभ: सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति

कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है? (Kaal Sarp Dosh Puja Vidhi)

पूजा से पहले की तैयारी:

  1. स्नान और शुद्धि – प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें
  2. वस्त्र – सफेद या केसरिया वस्त्र धारण करें
  3. संकल्प – पंडित जी से संकल्प करवाएं
  4. सामग्री – पूजा सामग्री की तैयारी

पूजा की मुख्य विधि:

  • गणपति पूजन – विघ्नहर्ता की आराधना
  • कलश स्थापना – पंचदेवताओं का आवाहन
  • नवग्रह शांति पूजा – सभी ग्रहों की शांति
  • राहु-केतु पूजन – मुख्य दोष निवारण
  • कालसर्प मंत्र जाप – “ॐ कालसर्पाय नमः”
  • हवन – पंचामृत और घी से आहुति
  • पूर्णाहुति और आशीर्वाद।

कालसर्प दोष पूजा के लिए प्रसिद्ध स्थान कौन-सा है?

त्र्यंबकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)

  • विशेषता: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक
  • पूजा शुल्क: ₹2,100 से ₹5,000 तक
  • समय: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक
  • संपर्क: 8421048228

कालसर्प दोष पूजा के नियम और सावधानियां क्या है?

पूजा से पहले:

  • ब्रह्मचर्य – पूजा से 3 दिन पहले तक ब्रह्मचर्य का पालन
  • शाकाहार – पूजा से एक दिन पहले शाकाहारी भोजन
  • मन की शुद्धि – क्रोध और ईर्ष्या का त्याग
  • सुबह उठना – ब्रह्ममुहूर्त (4:00-6:00 AM) में उठना

पूजा के दौरान:

  • ध्यान – पूरी एकाग्रता से मंत्र जाप
  • शांति – मोबाइल और अन्य विघ्नों से दूर रहें
  • आस्था – पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा

पूजा के बाद:

  • दान – गरीबों को भोजन और वस्त्र दान
  • जप – “ॐ नमः शिवाय” का नियमित जाप
  • सत्कर्म – सत्य बोलना और सदाचार का पालन

त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा में कितना खर्च आता है? (Cost of Kaal Sarp Dosh Puja)

प्रकारशुल्क (₹)समय अवधिविशेषताएं
सामान्य पूजा2,100 – 3,1002-3 घंटेमूल विधि
विशेष पूजा3,100 – 4,1004-5 घंटेहवन सहित
महापूजा5,000+6-8 घंटेसभी विधियां

कालसर्प दोष पूजा का प्रभाव कब तक रहता है?

यदि पूजा शुद्ध विधि से हो और सत्कर्मों का पालन किया जाए, तो इसका प्रभाव जीवनभर रहता है।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

लाभविवरण
राहु-केतु शांतिग्रहों की कुप्रभाव से मुक्ति
सफलताकरियर और व्यवसाय में उन्नति
स्वास्थ्य सुधारशारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार
पारिवारिक सुखघर में शांति और समृद्धि
आध्यात्मिक उन्नतिधार्मिक कार्यों में सफलता

त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग के लिए संपर्क कैसे करें?

2026 में त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग करना आज के समय में बहुत ही आसान है। आप सीधे पंडित जी से संपर्क, ऑनलाइन वैबसाइट या WhatsApp के माध्यम से आसानी से अपनी पूजा बुक कर सकते हैं। सही पंडित, सही मुहूर्त और सही विधि—ये तीन चीजें आपकी पूजा को सफल बनाती हैं।

यदि आप अपनी पूजा को सफल और लाभकारी बनाना चाहते है तो आज ही त्र्यंबकेश्वर के योग्य पंडित कैलाश शास्त्री जी से नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें और पूजा की बुकिंग करें।

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