वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जीवन-ऊर्जा, आत्मबल, प्रतिष्ठा और पिता का प्रतीक माना जाता है, जबकि केतु को वैराग्य, पूर्व जन्म के संस्कार और आध्यात्मिकता का कारक ग्रह कहा गया…
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान, पिता, नेतृत्व और आत्मविश्वास का कारक ग्रह माना गया है। जब जन्म कुंडली में सूर्य के साथ राहु की युति हो जाती है,…
अंगारक योग हिंदू ज्योतिष शास्त्र में एक अत्यंत शक्तिशाली और उग्र ग्रह योग माना जाता है। 'अंगारक' शब्द का अर्थ है 'अग्नि समान' या 'जलता हुआ कोयला'। यह मंगल ग्रह…
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मबल, पिता, मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। जब जन्म कुंडली में सूर्य पर राहु या केतु का प्रभाव पड़ता…
ज्योतिष शास्त्र में केतु को मोक्ष, वैराग्य और आध्यात्मिकता का कारक ग्रह माना गया है। लेकिन जब यही केतु कुंडली में अशुभ स्थिति में आ जाता है, तो व्यक्ति के…
ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह माना गया है, जो व्यक्ति के जीवन में भ्रम, भय, अचानक घटनाएँ और अस्थिरता लाता है। कुंडली में राहु की अशुभ स्थिति से…